मन के कोने मेरे मन में ढेर सारे कोने हैं मैं कुछ कोनों को जानता हूँ और कुछ कोने मुझे Thursday, 4 May 2017 read
आवाजें.. वे किस्से सुनाती हैंअंधेरों के बिखरने की रौशनी के रेशे उधेड़ कर देखती हैं अनगिनत बंद दरवाज़े पागलों सी आवाजें कौन आवाजें? आवाजें.. Wednesday, 21 September 2016 read
मैं खुद को तोड़ता मरोड़ता फिर से बनाता हूँ.. बचपन से जो कुछ भी सीखा है और दुनिया ने सिखाया है उस ज्ञान को भुलाना चाहता हूँ और इसी चाहत में मैं खुद से रोज़ इक जंग लड़कर हार जाता हूँ, मैं खुद को तोड़ता मरोड़ता फिर से बनाता हूँ .. Sunday, 17 April 2016 read