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रात

फ़र्ज़ कीजिए कि आप गिर रहे हों एक अंतहीन खाई में

Tuesday, 9 April 2019



देखो ना

1.

मेरे तकिए तले

हौले से उग आया है कुछ

तुम्हारी याद शायद रह गई है

Saturday, 8 July 2017



मन के कोने


मेरे मन में ढेर सारे कोने हैं
मैं कुछ कोनों को जानता हूँ
और कुछ कोने मुझे

Thursday, 4 May 2017



आवाजें..


वे किस्से सुनाती हैं
अंधेरों के बिखरने की
रौशनी के रेशे उधेड़ कर देखती हैं
अनगिनत बंद दरवाज़े
पागलों सी आवाजें

कौन आवाजें?
आवाजें..

Wednesday, 21 September 2016



मैं खुद को तोड़ता मरोड़ता फिर से बनाता हूँ..

बचपन से जो कुछ भी सीखा है
और दुनिया ने सिखाया है 
उस ज्ञान को भुलाना चाहता हूँ 
और इसी चाहत में 
मैं खुद से रोज़ इक जंग लड़कर 
हार जाता हूँ,
मैं खुद को तोड़ता मरोड़ता फिर से बनाता हूँ ..

Sunday, 17 April 2016