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पत्थर
तुमने जो
Tuesday, 20 February 2018
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मैं खुद को तोड़ता मरोड़ता फिर से बनाता हूँ..
बचपन से जो कुछ भी सीखा है और दुनिया ने सिखाया है उस ज्ञान को भुलाना चाहता हूँ और इसी चाहत में मैं खुद से रोज़ इक जंग लड़कर हार ...
आवाजें..
वे किस्से सुनाती हैं अंधेरों के बिखरने की रौशनी के रेशे उधेड़ कर देखती हैं अनगिनत बंद दरवाज़े पागलों सी आवाजें कौन आवाजें? आवाजें..
एक बेतुकी सी प्रेम कहानी
प्रेम कहानी और वह भी बेतुकी सी. ज़िन्दगी अक्सर बेतुकी बातों में ही अपने छंद संजो जाती है, जिन्हें पाने के लिए हम कितने ही प्रयत्न करते रह...
इंतज़ार
"अहा! तुम लौट आए." "लौटा तो हूँ, पर ठहरूँगा नहीं."
रात
फ़र्ज़ कीजिए कि आप गिर रहे हों एक अंतहीन खाई में
ब्लूज़
तुम कहती हो ये रेजिस्टेंस नहीं ठहर पाता,
देखो ना
1. मेरे तकिए तले हौले से उग आया है कुछ तुम्हारी याद शायद रह गई है
पत्थर
तुमने जो
फिलॉसफर
लहरों का बनना, बिगड़ना, आना, और वापस लौट जाना धीरज को उलझाये हुए था. उसने अपनी नज़र घुमाई तो देखा कि वाणी सामने की ओर देख रही है. मुग्ध, स्थि...
ट्रेन
मैं वक़्त से तीन घंटे पहले स्टेशन आ गया था। डिस्प्ले बोर्ड बता रहा था कि ट्रेन लेट थी। मुझे आए दो घंटे हुए थे। मैं प्लेटफॉर्म पर लगी स्टील ...
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